स प्रयोग विरह पीड़ा नाशक स्तोत्र / विरह पीड़ा विनाशकं ब्रह्म शक्ति स्तोत्रम्
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सबसे पहले तो हम आपका अपने इस पेज पर हार्दिक स्वागत करते हैं और जैसा कि मुझे आपकी खोज से पता चला है कि आप यहां पर सप्रयोग बिरह पीड़ा नाशक स्तोत्र को गूगल पर सर्च करके अपने पर्सनल लाइफ में होने वाली किसी विशेष समस्या समाधान के लिए आप यहां पर आएं हैं और यह भी सच है कि आपको इस सप्रयोग बिरह पीड़ा नाशक नामक स्तोत्र को सर्च करने के लिए किसी विशेष ज्योतिष पंडित ने ही सलाह दी है जिससे आपको अपने प्यार को फिर से पहले की तरह वापस पाने या आपके प्यार में किसी भी तरीके की समस्या समाधान को बिना एक रूपए खर्च किए मनवांछित परिणाम मिल सके,और आप भी यही तमन्ना लेकर यहां पर आएं हैं कि जो कि बिलकुल सही है,इस सप्रयोग बिरह पीड़ा नाशक नामक स्तोत्र को सर्च करके अब आपको भी इस रामबाण और अकाट्य तरीके से आपका मनचाहा समाधान और मनचाहा प्यार मिलने से कोई भी नहीं रोक सकता चाहे वह समस्या रिलेशनशिप को लेकर हो या शादीशुदा जिंदगी में तनाव या तलाक जैसी स्थिति ही क्यों ना हो, अब इस सप्रयोग बिरह पीड़ा नाशक स्तोत्र के प्रयोग से चाहे आपका पार्टनर दूरी बना रहा हो चाहे उसके घर वाले या फिर आपके घर वाले रिश्ते के लिए तैयार ना हो रहे हो इन सभी कार्य को बड़े ही आसान तरीके से आप सुलझा सकते हैं, अगर इसमें से कोई भी आपकी समस्या है तो हम आपको बताना चाहेंगे कि आप बिल्कुल सही जगह पर ही आएं हैं वास्तव में यह बहुत ही तेज और जल्दी एक मात्र प्रभाव दिखाने वाला प्रयोग है
इस सप्रयोग बिरह पीड़ा नाशक स्तोत्र से किसी भी तरीके के रिलेशनशिप प्रोब्लम, मैरिज प्राब्लम, ब्रेकअप प्रोब्लम, पार्टनर या अपने फैमली को शादी को मनाना यहां तक कि जो रिलेशनशिप पिछले 6 महीने या उससे ज्यादा के समय हो गऐ हैं बात को बंद हुए वह भी इस सप्रयोग विरह पीड़ा नाशक स्तोत्र से बड़े ही आसानी से फिर से बात चीत चालू हो जाती है, सिर्फ यही नहीं अगर आपका पार्टनर किसी दूसरे के प्यार में पड़ गया है या आपके रिलेशनशिप में कोई तीसरा व्यक्ति आ गया है तो भी यह उपाय किसी वरदान से कम नहीं है, और तो और इस सप्रयोग बिरह पीड़ा नाशक स्तोत्र से अगर आप चाहें तो अपने घर के किसी भी व्यक्ति चाहे वह भाई हो बहन हो,ननद हो सास हो देवर हो या स्वयं ससुर या ज्येष्ठ ही क्यों ना हो इसके प्रयोग से वह भी अपने अनुकूल हो जाते हैं,
सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका प्रयोग जैसी समस्या हो बस वैसा ही करना है जिसमें सबसे कम संख्या है मात्र और मात्र 11 से 21 या फिर 51से 108 बार बस जिसको आपको सिर्फ और सिर्फ 11 से 21 दिनों मात्र में ही यह अपना दिखाने लगता है,
तो आईए जान लेते हैं कि इसको करना कैसे हैं
सबसे पहले आपको पीले या गुलाबी वस्त्र पहन करके किसी पीले या लाल आसन पर बैठकर सामने एक घी का दीपक जलाना है ध्यान रखें इसको आप अपने घर में पूजा पाठ वाली जगह या किसी भी मंदिर में खास कर शिव जी के मंदिर में किसी एक निश्चित समय में चाहे वह सुबह दोपहर या शाम ही क्यों ना हो इस स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं
इसको अच्छे रेजेल्ट के लिए कमसे कम 21 से 108 पाठ प्रतिदिन करना चाहिए यथा उचित समस्या के अनुसार लगातार 11 से 21 दिनों तक इसको किसी भी सोमवार से चालू कर सकते हैं
पाठ के समय पति या पत्नी के प्रति अपने भाव पवित्र रखें। सोमवार और वृहस्पतिवार के दिन इसका पाठ बहुत ही अधिक फलदायी होता है, इसका प्रयोग शुरू करते समय भोलेनाथ और माता सती (भगवती गौरी) का प्रथम दिन पूजा अति आवश्यक है इसके बाद ही इसका (सप्रयोग बिरह पीड़ा नाशक) प्रयोग करें
सबसे पहले किसी पात्र (बर्तन) में थोड़ा सा जल लेकर बैठें और निचे दिए गए मंत्र को सिर्फ एक बार पढ़े
विनियोग:
ॐ अस्य विरह पीडा़ हर स्तोत्र स्य धाता ऋषिः अनुष्टुप् छन्दः कामिनी स्व रूपा पर मेश्वरी देवता मम (अमुकस्य / अमुक्याः(यहां पर जिसके लिए आप यह पूजा करने जा रहे हैं उनका नाम लिया जाएगा) समस्त विरह वेदना निवा रणे प्रिया /प्रेमी वियोग नाशने च पाठे विनि योगः।
ऐसा बोलकर या पढ़कर एक बार धरती (जमीन) पर जल गिरा दिजिए इसके बाद
करन्यास :
ॐ ब्राह्म्यै – अङ्गुष्ठा भ्यां नमः। ॐ परमा त्मव रूपायै – तर्जनी भ्यां
नमः । ॐ परमा नन्दरू पिण्यै
-मध्यमा भ्यां नमः । ॐ प्रकृ त्यै
-अनामिका भ्यां नमः। ॐ भद्र दायिन्यै सर्व मङ्ग लायै – करतल कर पृष्ठभ्यां नमः।
कनिष्ठिका भ्यां नमः । ॐ
ॐ ब्राहम्यै
उपर वाले की तरह से ही निचे दिए गए कार्य को भी करें
हृदयादि न्यास :
हृद याय नमः । ॐ परमात्म स्व रूपायै-शिर से
स्वाहा। ॐ परमा नन्द रूपिण्यै – शिखायै वषट् । ॐ प्र कृत्यै – कव चाय हुम्। ॐ भद्र दायिन्यै – नेत्र त्रयाय वौषट् । ॐ सर्व मङ्ग लायै – अस्त्राय
फट्।
स प्रयोग विरह पीड़ा नाशक स्तोत्र / विरह पीड़ा विनाशकं ब्रह्म शक्ति स्तोत्रम्
।। श्रीशिवोवाच ।।
ब्राह्मी ब्रह्म-स्वरूपे त्वं, मां प्रसीद सनातनी।परमात्म-स्वरूपे च, परमानन्द-रूपिणी।।ॐ प्रकृत्यै नमो भद्रे, मां प्रसीद भवनवे।सर्व मंगल रूपे च, प्रसीद सर्व मंगले।।
विजये शिवदे देवी ! मां प्रसीद जय-प्रदे।वेद-वेदांग-रूपे च, वेद-मातः! प्रसीद मे ।।शोकघ्ने ज्ञान-रूपे च, प्रसीद भक्त वत्सले।सर्व-सम्पत्-प्रदे माये, प्रसीद जगदम्बिके।।
लक्ष्मीनारायण-क्रोडे, सृष्टुर्वक्षसि भारती।मम क्रोधे महा-माया, विष्णु-माये प्रसीद मे।।काल-रूपे कार्य-रूपे, प्रसीद दीन-वत्सले।कृष्णस्य राधाके भद्रे, प्रसीद कृष्ण पूजिते।।
सर्वकामिनीरूपे, कलांशेन प्रसीद मे।।सर्व-सम्पत्-स्वरूपे त्वं, प्रसीद सम्पदां प्रदे।।यशस्विभिः पूजिते त्वं, प्रसीद यशसं निधेः।चराचर-स्वरूपे च, प्रसीद मम मा चिरम्।।मम योग-प्रदे देवी !
प्रसीद सिद्ध-योगिनी।सर्व-सिद्धि-स्वरूपे च, प्रसीद सिद्धि-दायिनी।।अधुना रक्ष मामिषे, प्रदग्घं विरहाग्निना।स्वात्म-दर्शन-पुण्येन, क्रणीहि भगवानि।।
।।फल-श्रुति।।
एतत् पथेच्छृणुयाच्च्न, वियोग-ज्वरो भवेत्। न भवेत् कामिनीभेदस्तस्य जन्मनि जन्मनि।।